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एनसीएल दुधीचुआ खदान पर 88 लाख की क्षतिपूर्ति का प्रस्ताव:सिंगरौली के बलिया नाला में प्रदूषण फैलाने पर कार्रवाई की सिफारिश
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एनसीएल दुधीचुआ खदान पर 88 लाख की क्षतिपूर्ति का प्रस्ताव:सिंगरौली के बलिया नाला में प्रदूषण फैलाने पर कार्रवाई की सिफारिश

📍 सिंगरौली   |   🕒 08 Jul 2026 09:15 AM

सिंगरौली स्थित एनसीएल (NCL) की दुधीचुआ कोयला खदान पर बलिया नाला में प्रदूषण फैलाने के आरोप में कार्रवाई की तैयारी कर ली गई है। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने खदान पर कुल ₹88 लाख का हर्जाना (क्षतिपूर्ति) लगाने और अन्य कानूनी कार्रवाई करने की सिफारिश की है।

यह कदम बारिश के बाद नाले में कोयला मिला हुआ दूषित पानी बहने का मामला सामने आने के बाद उठाया गया है। इस कार्रवाई का प्रस्ताव मंगलवार को ही तैयार किया गया है, जबकि मामले की जांच पिछले एक महीने से चल रही थी।

कलेक्टर गौरव बैनल के निर्देश पर मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मौके का मुआयना कर जांच की थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर बोर्ड ने सीनियर अफसरों के सामने कानूनी कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव में खदान प्रबंधन की ₹25 लाख की बैंक गारंटी जब्त करने की सिफारिश की गई है।

इसके साथ ही, बलिया नाला में कोयले वाला गंदा पानी रोकने के लिए प्रदूषण कंट्रोल के सही इंतजाम न करने पर करीब ₹63 लाख का पर्यावरणीय हर्जाना लगाने का भी प्रस्ताव है। यही नहीं, जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम के तहत अदालती कार्रवाई करने की मंजूरी भी मांगी गई है।

शर्तों का पालन न करने पर हुआ नाला प्रदूषित

शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि दुधीचुआ कोयला खदान से निकलने वाले गंदे पानी को रोकने और उसे साफ करने के लिए खदान प्रबंधन के पास कोई ठोस इंतजाम नहीं थे। इसी लापरवाही की वजह से बलिया नाला में प्रदूषित पानी बह गया।

जांच में यह भी पता चला है कि पहले दिए गए निर्देशों और तय कार्ययोजना के मुताबिक जो काम समय पर पूरे हो जाने चाहिए थे, वे नहीं किए गए। इसके अलावा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति की शर्तों का भी खदान प्रबंधन ने पूरी तरह उल्लंघन किया है।

पर्यावरण से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

कलेक्टर गौरव बैनल ने कहा कि जिले में पर्यावरण प्रदूषण फैलाने और पानी के स्रोतों को गंदा करने के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के नियमों और कानूनों को तोड़ने वाली संस्थाओं के खिलाफ नियम के मुताबिक सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन यहां के प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।